वाशिंगटन: दिग्गज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने अपनी कंपनी का नाम बदलकर मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक करने की घोषणा की है। इसके पीछे उनका तर्क है कि फेसबुक नाम में वह सब कुछ शामिल नहीं है, जो कंपनी अब करती है। हाल में एक के बाद एक कई खुलासे होने के कारण फेसबुक की पूरी दुनिया में फजीहत हुई है। समझा जा रहा है कि इससे पीछा छुड़ाने के लिए फेसबुक अपना नाम बदलने जा रही है।

फेसबुक की एक पूर्व कर्मचारी फ्रांसेस हौगेन ने कंपनी के बारे में कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं। उनके द्वारा लीक किए गए कंपनी के इंटरनल दस्तावेजों के आधार पर कई रिपोर्ट्स मीडिया में आई हैं। इन्हें फेसबुक पेपर्स नाम गया है। इससे दुनियाभर में फेसबुक की बहुत फजीहत हुई है। 37 साल की हौगेन ने अमेरिकी संसद की कमेटी में हुई पेशी में भी कई खुलासे किए। इन खुलासों के बाद फेसबुक की मुश्किलें बढ़ गई है।

फेसबुक की प्रॉडक्ट मैनेजर रहीं होगैन ने कहा कि फेसबुक से बच्चे बिगड़ रहे हैं, समाज में विभाजन हो रहा है और लोकतंत्र कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा कंपनी का एडवरटाइजिंग बेस्ड बिजनस मॉडल ज्यादा से ज्यादा लोगों को प्लेटफॉर्म से जुड़े रहने पर जोर देता है और कंपनी इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए निगेटिव इमोशंस का सहारा लेती है। कंपनी की लीडरशिप अच्छी तरह जानती है कि फेसबुक और इंस्टाग्राम को किस तरह सुरक्षित बनाया जा सकता है, लेकिन वे ऐसा नहीं करते हैं। उनके लिए लोगों की जिंदगी से ज्यादा अपने प्रॉफिट की चिंता है।

उन्होंने कहा कि फेसबुक के संस्थापक मार्क जकरबर्ग के पास कंपनी में आधे के अधिक वोटिंग शेयर्स हैं और कंपनी को चलाने के लिए वही जिम्मेदार हैं। कुछ सांसदों और आलोचकों ने फेसबुक को तोड़ने की वकालत की है, लेकिन हौगेन ने कहा कि इसके बजाय कंपनी को बदलाव के लिए मजबूर किया जाना चाहिए। इससे कंपनी का प्रॉफिट प्रभावित नहीं होगा। हौगेन ने एक दूसरे खुलासे में बताया कि भारत में यह प्लेटफॉर्म फेकबुक’ (फर्जी सामग्री की पुस्तक) की शक्ल लेता जा रहा है।

यूरोपियन यूनियन और ऑस्ट्रेलिया ने जिस तरह फेसबुक पर दबाव बनाया उससे फेसबुक की विश्वसनीयता खतरे में थी। ऑस्ट्रेलिया फेसबुक समेत इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्मो पर कानूनी रूप से नजर रखने की योजना बना रहा है। इसके लिए एक कानून बनाने की तैयारी है। इस कानून का उल्लंघन करने पर 75 लाख डॉलर का जुर्माना तक लग सकता है। फ्रांस में भी फेसबुक को स्थानीय मीडिया कंपनियों के साथ समझौता करने पर मजबूर होना पड़ा है। यह समझौता फेसबुक पर शेयर की जानी खबरों और लेखों के कॉपीराइट के बारे में है।