
बीजिंग: एक प्राचीन बिच्छू के अवशेषों की खोज पुरातत्वविदों ने की है जिसे टेरोप्टररस सियाशानेंटसीस के नाम से जाना जाता था। करीब 435 मिलियन साल पहले चीन के समुद्र पर एक विशालकाय बिच्छू का राज था। करीब 3.3 फुट यानी लगभग 1 मीटर लंबा यह बिच्छू शिकार के लिए अपने विशाल और कांटेदार हाथों का इस्तेमाल करता था।
अध्ययन के सह-लेखक बो वांग ने लिखा, 'यह अपने कांटेदार हाथों का इस्तेमाल संभवतः शिकार के लिए करता था।' खतरनाक जीव सीलूरीयम 443.8 मिलियन से 419.2 मिलियन साल पहले पाया जाता था। उस समय ये बिच्छू पानी में शिकार करने वाले सबसे खतरनाक शिकारी थे। इन्होंने मछलियों और मोलस्क को अपना शिकार बनाया होगा। ये शिकार को अपने नुकीले और बड़े हाथों से पकड़ते थे और उसे अपने मुंह में रख लेते थे।
बिच्छू के आकार अलग-अलग थे। इनमें सबसे छोटा बिच्छू मानव हाथ के आकार का और सबसे बड़ा लगभग वयस्क मानव के बराबर होता था। रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रजाति की खोज सबसे पहले 80 साल पहले की गई थी। इससे पहले वैज्ञानिकों ने एक बेहद दुर्लभ जीवाश्म की खोज की थी जो 1 करोड़ 60 लाख साल पहले पेड़ के गोंद में जम गया था। इस जीवाश्म में वैज्ञानिकों को टार्डीग्रेड की एक अज्ञात प्रजाति मिली थी।
नई प्रजाति इतनी अच्छी तरह से संरक्षित की गई थी कि वैज्ञानिकों ने इसकी खोज बड़ी आसानी से कर ली। एक रिसर्च में टार्डीग्रेड की नई प्रजाति की खोज का दावा किया गया था। यह प्रजाति डोमिनिकन रिपब्लिक में गोंद के भीतर जमी हुई पाई गई थी।यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ फ्लोरिडा के प्रफेसर फ्रेंक स्मिथ ने कहा कि जीवाश्म रिकॉर्ड सिर्फ दो तरह के टार्डीग्रेड का दावा करते हैं। ऐसे में तीसरी प्रजाति की खोज बहुत बड़ी बात है।
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