वॉशिंगटन: वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी की रिसर्च के मुताबिक मंगल पर फिलहाल पानी लिक्विड रूप में नहीं मौजूद है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतिहास में कभी मंगल पर पानी की संभावना हो सकती है लेकिन वायुमंडल के खत्म होने के साथ ही पानी का मिलना भी करीब-करीब नामुमकिन है। नई स्टडी में पोटैशियम के स्थिर आइसोटोप, रिमोट सेंसिंग और केमिकल अनैलेसिस की मदद ली गई। इसमें पानी जैसे एलिमेंट्स के मंगल से गायब होने की गति को देखा गया। इसमें पता चला कि अब लाल ग्रह पर पानी नहीं है।
टीम ने मंगल के उल्कापिंडों को स्टडी किया और पाया कि मंगल से पानी और पोटैशियम जैसे एलिमेंट्स गायब हो गए हैं और यह धरती की तुलना में ज्यादा तेजी से हुआ है। स्टडी के सीनियर लेखक कुन वान्ग का कहना है कि मंगल के उल्कापिंड करोड़ों साल पहले के हैं। ये मंगल के विकास के इतिहास की कहानी सुनाते हैं। वान्ग का कहना है कि मंगल का आकार और द्रव्यमान ऐसा नहीं है कि यहां जीवन के लायक पानी बचा हो।
वहीं, फरवरी में मंगल पर पहुंचे अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के प्रीजरवरेंस रोवर ने हाल ही में मंगल ग्रह पर चट्टान के सैंपल इकट्ठा किया जिसमें जीवन की मौजूदगी से जुड़े अहम सवालों के जवाब छिपे हो सकते हैं। रोवर ने जेझेरो क्राटेर में जिस चट्टान के सैंपल लिए हैं, वह ज्वालामुखी का लावा जमने के कारण बनी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि जब जेझेरो क्राटेर में पानी रहा होगा तो वह इसकी अंदर की परतों में चला गया होगा और मुमकिन है कि पानी के सूखने के बाद सिर्फ नमक वहां रह गया।
नासा की ग्राउंड टीम के मुताबिक चट्टानी सैंपल में ऐसे नमक हैं जो शायद तब बने होंगे जब भूमिगत जल ने पहले से मौजूद खनिजों की बनावट को बदल दिया होगा। हो सकता है पानी के वाष्पित होने के बाद नमक बचे रह गए हों। नासा ने बताया है कि नमक में शायद पानी भी रहा होगा।
बता दें कि मंगल ग्रह पर पानी है या नहीं? इस सवाल के जवाब में आज तक कई सबूत तो नहीं मिला है लेकिन एक नई रिसर्च में पुरानी कई थिअरीज को गलत जरूर बताया गया है। कुछ स्टडीज में संकेत दिए गए थे कि मंगल पर आयन की शक्ल में पानी हो सकता है लेकिन ताजा अध्ययन इसके उलट संकेत दे रहे हैं।

2 टिप्पणियाँ
Achhha
जवाब देंहटाएंAb tak hum vaise he mangal par Jane ki baat kar rahe the
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